​📰 मनरेगा (MGNREGA) पर ताजा अपडेट: नाम बदला, काम के दिन बढ़े

हाल ही में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA/मनरेगा) को लेकर कई अहम और बड़े बदलाव सामने आए हैं। इन बदलावों को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और राजनीति दोनों के गलियारों में चर्चा गरम है।

​💡 मुख्य बदलाव क्या हैं?

सूत्रों और रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्रीय कैबिनेट ने मनरेगा योजना के स्वरूप में बदलाव करते हुए दो सबसे महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं:

  1. नाम परिवर्तन: मनरेगा (MGNREGA) का नाम बदलकर अब “पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना” (Pujya Bapu Grameen Rozgar Yojana) किया जा रहा है।
  2. कार्य दिवसों में वृद्धि: इस योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को 100 दिनों के गारंटीकृत रोजगार को बढ़ाकर अब 125 दिन करने का फैसला लिया गया है।

​📝 संभावित नए कानून की चर्चा

इसके अलावा, सबसे ताज़ा खबर यह है कि सरकार MGNREGA को रद्द करके एक नया ग्रामीण रोजगार कानून लाने पर विचार कर रही है।​संभावित नया कानून:

“विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)” (Viksit Bharat-Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin) – VB-G RAM G) विधेयक, 2025।​

उद्देश्य: यह विधेयक विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप ग्रामीण विकास ढांचा स्थापित करना चाहता है, जिसमें 125 दिनों के अकुशल काम की कानूनी गारंटी होगी।

​यह विधेयक लोकसभा सदस्यों के बीच वितरित किया गया है और जल्द ही संसद में पेश होने की संभावना है।

सरकार का दावा है कि ये बदलाव योजना की पारदर्शिता बढ़ाएंगे और जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को मजबूती देंगे। 125 दिन के रोजगार की गारंटी ग्रामीण मजदूरों के लिए बड़ी राहत है जो लंबे समय से इसकी मांग कर रहे थे।

वही विपक्षी दलों ने इस नाम परिवर्तन पर कड़ा विरोध जताया है। उनका आरोप है कि यह कदम केवल इतिहास बदलने की कोशिश है और योजना की मूल पहचान को मिटाने जैसा है। मनरेगा योजना यूपीए-1 सरकार की एक प्रमुख पहल थी।

​📊 योजना की वर्तमान स्थिति

​शुभारंभ: यह योजना 2005 में शुरू हुई थी।​

मौजूदा लाभार्थी: इस स्कीम के तहत 15 करोड़ से अधिक लोग काम कर रहे हैं (जिसमें लगभग एक-तिहाई महिलाएं हैं)।

​मजदूरी: मनरेगा में हर दिन मजदूरों को औसतन लगभग ₹267.01 मिलते हैं।​

कोविड के दौरान: 2020-21 में कोविड-19 महामारी के दौरान, रिकॉर्ड 7.55 करोड़ परिवारों को इसका लाभ मिला था, जिसने प्रवासियों के लिए जीवन-रक्षक सुरक्षा कवच का काम किया था।

यह देखना दिलचस्प होगा कि ये बदलाव ग्रामीण रोजगार और भारतीय राजनीति पर क्या असर डालते हैं।

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